कल
मेरे साथ था
बहुत खुश
जिंदादिल और खुशियों से भरा
शायद मैं उसे जानता था
या शायद नहीं
पर फिर भी बह
मुझे अपना सा लगा
मैं रोज उस से बातें करता
मन की कह देता हर बात
पर बह नहीं है
आज मेरे साथ
मैं हूँ आज
तनहा
,अकेला
,और उदाश
आज नहीं बो
मुझे बहलायेगा
और न ही हसाएगा
वो केवल एक विस्फोट था
पर मैं फिर अकेला हूँ
ये कौन है जो करते है
विस्फोट
हत्या
और क़त्ल
ये धरम के दीबने है
या कोई और
ये आज भेष मैं मानव के ह
ै कोई नया रावन
जो करते है
लोगो की खुशियों का
हरण और विनाश
क्या लिंगे फिर प्रभु
दुवारा अबतार
या फिर यु ही रहेंगे हम
बेबस,
कमजोर
और लाचार
Tuesday, July 19, 2011
Monday, July 18, 2011
मेरा भारत महान
मैं
नींद के आगोश मैं
,इस मोह जाल मैं,
नृप नरेश काल मैं ,
मंद मंद कोल्हाल मैं ,
देखता हूँ इस देश को ,
एक नए भेष को ,
हर तरफ अमन है ,
शांति काल परवल है ,
लोग खुशहाल है ,
हर तरफ िननाद ह,
देश पर्व हर और है
हर तरफ मनुष्य है
ये नया दृश्य है
मैं सुपन काल मैं हूँ
बर्तमान विदीप्त है ,
जल रहा मनुष्य है
लोग वेहाल है ,
लोग भयभीत है ,
हर तरफ कोल्हाल है
मैं देखता हूँविनाश को ,
राज रस रंग है ,
प्रजा वेप्रसंग है
कोई पहचानता नहीं
कोई जनता नहीं ,
मैं सोचता हूँ जाग कर ,
निद्राकाल त्याग कर ,
क्या ये बही देश है
क्या राज सो रहा
ये देश क्यों रो रहा ,
उठ खड़ा हो मनुष्य ,
बदल काल के इस वेग को,
सत्ता लोभ लोप हो ,हर तरफ ये जोर हो,
मेरी आन बान शान है ,
ये भारत देश महान है
नींद के आगोश मैं
,इस मोह जाल मैं,
नृप नरेश काल मैं ,
मंद मंद कोल्हाल मैं ,
देखता हूँ इस देश को ,
एक नए भेष को ,
हर तरफ अमन है ,
शांति काल परवल है ,
लोग खुशहाल है ,
हर तरफ िननाद ह,
देश पर्व हर और है
हर तरफ मनुष्य है
ये नया दृश्य है
मैं सुपन काल मैं हूँ
बर्तमान विदीप्त है ,
जल रहा मनुष्य है
लोग वेहाल है ,
लोग भयभीत है ,
हर तरफ कोल्हाल है
मैं देखता हूँविनाश को ,
राज रस रंग है ,
प्रजा वेप्रसंग है
कोई पहचानता नहीं
कोई जनता नहीं ,
मैं सोचता हूँ जाग कर ,
निद्राकाल त्याग कर ,
क्या ये बही देश है
क्या राज सो रहा
ये देश क्यों रो रहा ,
उठ खड़ा हो मनुष्य ,
बदल काल के इस वेग को,
सत्ता लोभ लोप हो ,हर तरफ ये जोर हो,
मेरी आन बान शान है ,
ये भारत देश महान है
बारिश की एक बूँद
मेरा मन
अकेला
उदाश और तमनाउओसे भरा
मेरा दिल चादनी की शीतलता की तरह
हर तरफ तपिस है
जलन है
और नफरत की आधियाँ है
मुझको भिगो जाती है
एक बूँद बारिश की
जो भरी है मुहबात स
े प्यार से
और अपनेपन स
े पर इस तपिश मैं
इस जलन मैं
और नफरत मैं
खो न जाये
एक बूँद बारिश की
जो भरी है मुहबत से
प्यार से
और अपनेपन से
अकेला
उदाश और तमनाउओसे भरा
मेरा दिल चादनी की शीतलता की तरह
हर तरफ तपिस है
जलन है
और नफरत की आधियाँ है
मुझको भिगो जाती है
एक बूँद बारिश की
जो भरी है मुहबात स
े प्यार से
और अपनेपन स
े पर इस तपिश मैं
इस जलन मैं
और नफरत मैं
खो न जाये
एक बूँद बारिश की
जो भरी है मुहबत से
प्यार से
और अपनेपन से
हसीं खाव्ब
कही कुछ सोते ,
कुछ जागते पल ,
कुछ चुप से कुछ कह जाते पल
मेरी आँखें बंद है पर मैं सोया नहीं हूँ
आँखों मैं मेरे पानी है पर मैं रोया नहीं हूँ
कुछ लोग कहते हैं मुजको मुसाफिर ,
मैं अकेला तो हूँ
पर भीड़ मैं भी मैं खोया नहीं हूँ
कुछ जागते पल ,
कुछ चुप से कुछ कह जाते पल
मेरी आँखें बंद है पर मैं सोया नहीं हूँ
आँखों मैं मेरे पानी है पर मैं रोया नहीं हूँ
कुछ लोग कहते हैं मुजको मुसाफिर ,
मैं अकेला तो हूँ
पर भीड़ मैं भी मैं खोया नहीं हूँ
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