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Monday, July 18, 2011

हसीं खाव्ब

कही कुछ सोते ,
कुछ जागते पल ,
कुछ चुप से कुछ कह जाते पल
मेरी आँखें बंद है पर मैं सोया नहीं हूँ
आँखों मैं मेरे पानी है पर मैं रोया नहीं हूँ
कुछ लोग कहते हैं मुजको मुसाफिर ,
मैं अकेला तो हूँ
पर भीड़ मैं भी मैं खोया नहीं हूँ

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