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Tuesday, July 19, 2011

आतंकवाद

कल
मेरे साथ था
बहुत खुश
जिंदादिल और खुशियों से भरा
शायद मैं उसे जानता था
या शायद नहीं
पर फिर भी बह
मुझे अपना सा लगा
मैं रोज उस से बातें करता
मन की कह देता हर बात
पर बह नहीं है
आज मेरे साथ
मैं हूँ आज
तनहा
,अकेला
,और उदाश
आज नहीं बो
मुझे बहलायेगा
और न ही हसाएगा
वो केवल एक विस्फोट था
पर मैं फिर अकेला हूँ
ये कौन है जो करते है
विस्फोट
हत्या
और क़त्ल
ये धरम के दीबने है
या कोई और
ये आज भेष मैं मानव के ह
ै कोई नया रावन
जो करते है
लोगो की खुशियों का
हरण और विनाश
क्या लिंगे फिर प्रभु
दुवारा अबतार
या फिर यु ही रहेंगे हम
बेबस,
कमजोर
और लाचार

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